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Cinderella Story in Hindi Written / सिंडरेला की कहानी हिंदी में

Cinderella Story in Hindi  सिंड्रेला  एक खूबसूरत लड़की थी। वह बचपन में जब गुड्डे – गुड्डी का खेल खेलती तो उसका भी मन करता कि एक खूबसूरत सा राजकुमार उसे घोड़ी पर बिठा कर ले जाए।  लेकिन बचपन में ही उसके माँ की मृत्यु हो गयी थी ।  माँ की मृत्यु के बाद सिंड्रेला के पिताजी ने दूसरी शादी की।

 

 

 

माँ की मृत्यु से सिंड्रेला उदास रहने लगी।  उसकी मुश्किल इतने पर भी ख़त्म नहीं हुई।  उसकी सौतेली की दो बेटियां पहले से ही थी।  सभी सिंड्रेला से बहुत नफ़रत करते थे।

 

 

 

सिंडरेला की कहानी हिंदी में ( Cinderella Story in Hindi Wikipedia )

 

 

 

 

सिंड्रेला की मुश्किलें ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी।  इस सभी मुसीबतों से वह किसी तरह से लड़ रही थी कि तब तक उसके पिताजी की मृत्यु हो गयी।

 

 

 

 

सिंड्रेला की सौतेली माँ और उसकी सौतेली बहने हमेशा सिंड्रेला से चिढ़ती थीं।  वे सिंड्रेला से घर का सब काम करवाते और खाने में केवल बचा हुआ खाना देते थे।

 

 

 

 

 

सिंड्रेला का वास्तविक नाम एला था।  लेकिन उसकी सौतेली माँ और बहने उससे बहुत काम कराती थीं।  बेचारी एला इतनी थक जाती कि अंगीठी के पास ही सो जाती और जब वह सुबह उठती तो अंगीठी ( सिंडर ) की राख उसपर पड़ी रहती थी।

 

 

 

 

 

इससे उसकी बहनें उसे सिंडर – एला कहककर चिढ़ाती थी।  जिससे उसका नाम सिंडरेला हो गया।  इधर राज्य के राजा का लड़का युवावस्था में पहुँच गया था।  उन्हें अपने लडके के विवाह की चिंता हो रही थी।  यह सब बातें उन्होंने अपने मंत्रियों को बताया।

 

 

 

 

मंत्रियों ने उन्हें राजमहल में एक ख़ास कार्यक्रम का आयोजन करने को कहा और उसमें राज्य के उन परिवारों जिनके घर में युवा लड़कियां थीं उनके परिवार को आमंत्रित करने का सुझाव दिया।

 

 

 

 

राजा को मंत्री का सुझाव बहुत पसंद आया।  उन्होंने पुरे राज्य में उत्सव की घोषणा कर दी।  सिंड्रेला भी इस उत्सव में जाने को उत्सुक थी, लेकिन उसकी सौतेली माँ उसे जाने नहीं दिया।

 

 

 

 

सिंड्रेला की बहनें और उसकी माँ ने खूबसूरत कपड़ा पहना और राजभवन को रवाना हो गयी।  इधर सिंड्रेला बहुत फूट – फूटकर रोने लगी।  तभी अचानक से वहाँ लालपरी प्रकट हुई।

 

 

 

 

उसे देखकर सिंड्रेला हैरान रह गयी।  तब लाल परी ने कहा, ” हैरान ना हो सिंड्रेला।  मुझे तुम्हारे बारे में सबकुछ पता है।  अब तुम्हारी हर परेशानी ख़त्म होने वाली है। तुम भी राजभवन को जाओगी। ”

 

 

 

 

” लेकिन कैसे ? मेरे पास कपडे भी नहीं हैं और अब तो पहुँचने का समय भी नजदीक आ गया है ” सिंड्रेला ने निराश होते हुए से कहा।

 

 

 

परी ने मुस्कुराते हुएए अपनी छड़ी घुमाई और सिंड्रेला के फटे – पुराने कपड़े बेहद ही आकर्षक पोशाक में बदल गयी और उसकी सैंडल चमकीले शीशे की जूती में बदल गयी और उन्होंने एक खूबसूरत जादुई बग्गी का भी बंदोबस्त कर दिया, जिसमें खूबसूरत घोड़े लगे हुए थे।

 

 

 

 

सिंड्रेला इससे बड़ी खुश हुई और उसने परी को धन्यवाद किया।  तब परी ने कहा, ” सिंड्रेला यह बात ध्यान रखना कि यह जादू रात १२ बजे तक ही काम करेगा।  तुम्हे इसके पहले ही वापस लौटना होगा।  ”

 

 

 

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सिंड्रेला ने एक बार फिर से परी को धन्यवाद किया और राजमहल की तरफ चल दी।  उसकी बग्गी तेज रफ़्तार से भागी और समय से वह पहुँच गयी।

 

 

 

 

जब सिंड्रेला वहां पहुंची तो हर कोई बस उसकी खूबसूरती को निहारता रह गया।  सबकी निगाहें सिंड्रेला पर अटक गयीं।  वह पहचान में ही नहीं आ रही थी।  यहां तक की उसकी सौतेली माँ और बहनें भी उसे पहचान नहीं पायी।

 

 

 

 

राजकुमार ने जैसे ही सिंड्रेला को देखा उसका दीवाना हो गया।  वह पूरी पार्टी में सिर्फ सिंड्रेला के  साथ ही नृत्य  करता रहा।  सिंड्रेला बहुत प्रसन्न थी।  अचानक उसे परी की बात याद आ गयी।  उसनेसमय देखा बारह बजने ही वाले थे।

 

 

 

वह तेजी से वहाँ से निकली। उसके  पीछे राजकुमार भी तेजी से भागा। उसी जल्दबाज़ी में सिंड्रेला की  शीशे की  एक  जूती  उसके पैरों से निकल गयी ।  सिंड्रेला के पास उसे उठाने का समय नहीं था।  वह तेजी से भागी और वहा से अपने घर चली आयी।

 

 

 

 

राजकुमार ने वह जूती को रख लिया।  राजकुमार ने अपने पिताजी को सारी बात बताई और कहा, ” मैं उसी लड़की से शादी करूंगा जिसके पैर  में यह जूती आएगी।  ”

 

 

 

 

राजा ने पूरे राज्य में अपने मंत्री और सैनिकों को भिजवाया और आदेश दिया कि, ” जिस भी लड़की के पैर  में यह जूती आये उसे पुरे सम्मान से राजमहल में लाया जाए।  ”

 

 

 

राजा के मंत्री और सैनिक घर – घर में जाकर सभी युवा लड़कियों को वह जूती पहनाकर देखने लगे लेकिन वह किसी के पैर में नहीं बैठी। अंत में वह सिंड्रेला के घर आये।

 

 

 

वहाँ उसकी सौतेली बहनों उसे पहनने की पूरी कोशिश की लेकिन उसके पैर में वह नहीं आयी। इसी बीच सिंड्रेला उन मंत्रियों के लिए पानी लेकर आयी।

 

 

 

जब मुख्य मंत्री ने सिंड्रेला को भी जूती पहनने की कोशिश करनी चाही।  तब उसकी सौतेली माँ ने कहा, ” अरे यह तो नौकरानी है।  इसे क्यों पहना रहे हो ? ”

 

 

 

 

 

इस पर मंत्री ने उसे डांट दिया  और सिंड्रेला को जूती पहनाने को कहा।  सिंड्रेला को जूती पूरी तरह से हो गयी।  सभी लोग बेहद हैरान थे।  मंत्री ने उसे ससम्मान राजमहल  ले आये।

 

 

 

वहाँ उसकी राजकुमार  ने उससे विवाह का आग्रह किया।  सिंड्रेला भी राजकुमार से प्रेम करने लगी थी।  वह मान गयी और दोनों की शादी हो गयी।  दोनों ख़ुशी से रहने लगे।

 

 

 

 

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