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Gulabi Pari ki Kahani in Hindi Written / गुलाबी परी की कहानी हिंदी में

Gulabi Pari ki Kahani in Hindi आज गुलाबी परी का जन्मदिन है।  पूरा परीलोक रंग – बिरंगी रोशनी से सजाया गया है।  रानीपरी ने गुलाबी परी से बोला, ” तुम्हे क्या उपहार चाहिए।  ” इसपर गुलाबी परी ने कहा, ” मैं धरती लोक पर जाना चाहती हूँ।  मैं देखना चाहती हूँ कि धरती कितनी सुन्दर है।  ”

 

 

 

 

इसपर रानीपरी ने कहा, ” कोई दूसरा उपहार मांगों।  मैं तुम्हे धरतिलोक पर नहीं भेज सकती।  ” इसपर गुलाबी परी रूठ गयी।  तब रानीपरी ने कहा, ” ठीक है।  तुम कल धरती लोक पर जाओ, लेकिन तुम्हारे संग नीलिमा परी और लालपरी भी जायेंगी और हाँ सूर्य की पहली किरण निकालने के पहले ही वापस आ जाना नहीं तो तुम्हारे पंख सूर्य की रोशनी में जल जायेंगे और तुम फिर कभी नहीं आ पाओगी।  ”

 

 

 

 

गुलाबी परी की कहानी इन हिंदी ( Gulabi Pari ki Kahani in Hindi Pdf )

 

 

 

 

गुलाबी परी ने खुश हो गयी और वह अगले दिन का इन्तजार  करने लगी। अगले दिन रात के समय गुलाबी परी, नीलिमा परी और लालपरी धरती लोक के लिए निकली।  चलते समय रानीपरी ने उन्हें फिर से कहा कि सुबह जल्दी आ जाना।

 

 

 

 

कुछ ही समय में परियां एक बाग़ में उतरी।  तरह – तरह के फूल खिले थे।  बगल में सरसों के खेत में सरसों पर पीले फूल लगे थे।  पृथ्वी मानो स्वर्ग लग रही थी।  यह देखकर परियां मंत्रमुग्ध हो गयीं और नाचने लगीं।

 

 

 

 

 

इस बीच उन्हें रानीपरी की बातों का बिलकुल भी ख्याल नहीं रहा।  तभी अचानक से उन्हें रानीपरी की आवाज सुनाई दी, ” मैंने कहा था न जल्दी आ जाना।  अभी कुछ ही देर में सूर्य की किरणे धरती पर आ जाएँगी और तुम फिर कभी नहीं आ पाओगी।  ”

 

 

 

 

उन्हें तुरंत ही अपनी गलती का एहसास हो गया।  वे तुरंत ही वहाँ से चलीं और परीलोक पहुँच गयीं।  रानीपरी बहुत क्रोधित थी।  गुलाबी परी ने उनसे क्षमा मांगी और फिर कभी पृथ्वी पर नहीं जाने की बात कही।

 

 

 

गुलाबी परी का मासूम चेहरा देखकर रानीपरी हंसने लगीं और पूछी, ” पृथ्वीलोक कैसा है ? ” इसपर गुलाबी परी ने कहा, ” बहुत ही खुबसूरत।  वहाँ तरह – तरह के फूल हैं।  खेत – खलिहान आदि है।  ”

 

 

 

 

गुलाबी परी की बात सुनकर रानीपरी ने कहा, ” अब से हर पूर्णिमा के दिन हम सभी परियां धरती लोक पर जायेंगी।  ” गुलाबी परी और तब से परियां पृथ्वीलोक पर आने लगीं और फिर वे भले और नेकदिल बच्चों की सहायता करने लगीं।

 

 

 

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इस तरह से उनका मानवों से रिश्ता स्थापित हो गया। अब गुलाबी परी अकेले भी धरती लोक पर आने जाने लगी।  एक दिन की बात है वह धरती लोक पर गयी थी और वह सुबह जल्द जाने की बात भूल गयी।

 

 

 

 

 

सुबह सूरज की पहली किरण धरती पर पड़ते ही उसके पंख जल गए।  अब वह उड़ने में असमर्थ थी।  उसने रानी परी से मदद मांगी लेकिन रानी परी ने असमर्थता जाहिर की।

 

 

 

 

गुलाबी परी निराश होकर एक गाँव से दुसरे गाँव में घुमने लगी। उसे ना भूख लगाती और ना ही प्यास लगाती।  घुमते – घुमते वह एक गाँव में पहुंची तो देखा पुरे गाँव में महामारी फैली हुई थी।

 

 

 

 

पूरा गाँव इस बिमारी से परेशान हो गया था।  कितनों की जान भी चली गयी थी।  उस नगर के राजा ने बड़ी ही कोशिश की की, बहुत सारे वैद्य को बुलाया, लेकिन कोई इसे ठीक नहीं कर पा रहा था।

 

 

 

 

परी ने अपनी गुलाबी शक्तियों से पल भर में ही इस बिमारी को ख़त्म कर दिया।  सभी लोग बड़े प्रसन्न  हुए।  यह बात राजा तक भी पहुंची।  वे स्वयं परी से मिलने आए।

 

 

 

 

परी से मिलाने के बाद वे उससे बहुत ही प्रभावित हुए और उसके सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया।  परी भी राजा से बहुत प्रभावित थी सो  उसने भी हाँ कह दी।

 

 

 

 

दोनों की धूमधाम से शादी हो गयी।  सब कुछ बढ़िया से गुजरने लगा।  एकबार अचानक से राजा की तबियत खराब हुई और वह बिगड़ती ही चली गयी।

 

 

 

 

राजा ने परी को राज्य का भार सौप दिया।  कुछ दिनों बाद राजा की मृत्यु हो गयी।  राजा की मृत्यु के बाद परी राज्य की रानी बनी।  वह राज्य को बहुत ही अच्छे से चलाने लगी।

 

 

 

 

राज्य की ख्याति पहले से भी अधिक बढ़ गयी थी।  एक बार की बात है पाताल लोक का राक्षस परी लोक पर आक्रमण कर दिया।  परियों ने बड़ी ही शक्ति के साथ उसका मुकाबला किया परन्तु उसकी शक्ति के आगे वह हारने लगी।

 

 

 

 

इसपर काली परी ने रानी परी को सुझाव दिया कि हमें पृथ्वी लोक के राज्य की सैन्य सहायता लेनी चाहिए।  यह सोचकर रानीपरी ने पृथ्वीलोक के सबसे ताकतवर राज्य के बारे में पता करने के लिए कहा।

 

 

 

 

 

कुछ देर बाद काली परी ने बताया, ”  हमें पृथ्वी के सबसे शक्तिशाली राज्य के बारे में पता चल गया है और उस राज्य को एक रानी चला रही है। ”

 

 

 

 

” चलो यह तो और भी अच्छा है।  वह हमारी बात को और भी अच्छे से समझ सकेगी।  ” यह कह कर रानी परी उस राज्य में पहुंची।  राजमहल में पहुंचने के बाद उन्होने देखा, ” यह तो गुलाबी परी है।  ”

 

 

 

 

उन्होंने सोचा अब हमें कोई मदद नहीं मिलेगी, लेकिन गुलाबी परी ने उनका बहुत ही स्वागत किया और आने का कारण पूछा।  इसपर रानी परी ने पूरी बात बता दी।

 

 

 

 

तब गुलाबी परी ने अपनी सबसे ताकतवर सैन्य टुकड़ी को रानीपरी के साथ भेजा।  उसने उस राक्षस को मार गिराया।  रानी परी ने खुश होकर गुलाबी परी को नए पंख दिए और परीलोक चलने के लिए कहा।

 

 

 

 

तब गुलाबी परी ने कहा, ” नहीं मैं परीलोक नाहिंन आ सकती।   मैं अपना वादा नहीं तोड़ सकती हूँ।  मैंने अपने पति राजा साहेब को वादा किया था कि मरती दम तक राज्य और राज्य के लोगों की सेवा करुँगी।  ”

 

 

 

 

तब रानीपरी ने उसे शुभकामना दी और थोड़े – थोड़े समय के लिए परीलोक आने का आग्रह किया।  गुलाबी परी मान गयी और समय – समय पर परीलोक जाने लगी।

 

 

 

 

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